भगवान श्री राम- जीवन-परिचय
श्रीराम का जीवन केवल एक कथा नहीं, बल्कि एक ऐसा आदर्श है जिसे अपनाकर कोई भी व्यक्ति अपने जीवन को बेहतर बना सकता है। राम—पुत्र के रूप में, भाई के रूप में, राजा के रूप में, मित्र के रूप में और यहां तक कि शत्रु के रूप में भी—हर भूमिका में सर्वश्रेष्ठ दिखाई देते हैं।
श्रीराम का जीवन हमें सिखाता है कि धर्म, कर्तव्य, आदर्श और मर्यादा को निभाना केवल महान लोगों के लिए नहीं, बल्कि हर इंसान के लिए आवश्यक है।
1. भगवान् श्री राम और परिवार –
वे अयोध्या के इक्ष्वाकु वंश के राजा दशरथ और रानी कौशल्या के पुत्र थे।
उनके तीन भाई थे—भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न।
राम विष्णु के सातवें अवतार माने जाते हैं।
2. बचपन और शिक्षा –
राम का बचपन अत्यंत सरल, वीरता और संतुलन से भरा हुआ था।
उन्हें ऋषि वशिष्ठ के आश्रम में वेद, धनुर्विद्या, शास्त्र और नीति की शिक्षा मिली।
किशोर अवस्था में ही उन्होंने ऋषि विश्वामित्र के साथ राक्षसों का वध किया और धर्म की रक्षा की।
3. सीता से विवाह-
मिथिला के राजा जनक की पुत्री सीता स्वयंवर में, राम ने शिवधनुष तोड़कर उनका वरण किया।
यह दिव्य विवाह त्रेतायुग के सबसे पवित्र मिलनों में से एक माना जाता है।
4. राम का वनवास (14 वर्ष)-
कौशल्या के बड़े पुत्र होने के कारण राम को राजगद्दी मिलनी थी, लेकिन कैकेयी के वचन के कारण उन्हें 14 वर्ष का वनवास मिला।
राम के साथ सीता और लक्ष्मण भी वन में गए।
तीनों ने तपस्वी जीवन जीते हुए अनेक ऋषियों की रक्षा की और राक्षसों का अंत किया।
श्रीराम का जीवन केवल एक कथा नहीं, बल्कि एक ऐसा आदर्श है जिसे अपनाकर कोई भी व्यक्ति अपने जीवन को बेहतर बना सकता है। राम—पुत्र के रूप में, भाई के रूप में, राजा के रूप में, मित्र के रूप में और यहां तक कि शत्रु के रूप में भी—हर भूमिका में सर्वश्रेष्ठ दिखाई देते हैं।
राम का जीवन हमें सिखाता है कि धर्म, कर्तव्य, आदर्श और मर्यादा को निभाना केवल महान लोगों के लिए नहीं, बल्कि हर इंसान के लिए आवश्यक है।
श्रीराम जैसा जीवन क्यों आदर्श माना जाता है?
हर इंसान चाहता है कि उसके जीवन में —
राम जैसा पुत्र
राम जैसा भाई
राम जैसा पति
राम जैसा राजा
और राम जैसा मर्यादित व्यवहार हो
राम का चरित्र एक ऐसा दर्पण है जिसमें कोई भी खुद को सुधार सकता है।
भगवान शिव द्वारा श्रीराम नाम की महिमा।
त्याग दी सभी ख्वाहिशें निष्काम बनने के लिए। राम ने खोया बहुत कुछ श्री राम बनने के लिए। किसी ने कितना सटीक कहा है कि जिस पर हमारा हक ना हो और लेने की जिद हो तो महाभारत होती है और अपना भी सब कुछ त्याग दें तो फिर रामायण होती है। साथियों रामायण एक ग्रंथ ही नहीं जीवन को जीने की शैली है। रामायण के बहुत से लेसंस को आज मैनेजमेंट इंस्टट्यूट्स में पढ़ाया जाता है।
एक कथा के अनुसार, भगवान शिव के तीन पुत्र थे—देव, दानव और मानव।
इन तीनों को जब शिव ने अपनी आध्यात्मिक संपदा बांट दी, तब उन्होंने अंतिम दो अक्षर अपने पास रखे —
“रा” और “म”।
यही वो दो अक्षर हैं जिनके सहारे—
शिव स्वयं कहते हैं — “मैं जीवन जी सकता हूँ।”
यही राम नाम की सर्वोच्च महिमा है।
श्रीराम का वनवास, रावण वध नहीं, बल्कि आदर्श स्थापना का उद्देश्य-
अधिकतर लोग समझते हैं कि राम का वनवास केवल रावण वध के लिए था।
लेकिन शबरी से राम कहते हैं—
“मैं रावण को मारने नहीं, बल्कि आप जैसे लोगों से मिलने आया हूँ।
मेरी यात्रा आदर्श स्थापित करने के लिए है।”
इससे पता चलता है कि राम का वनवास केवल युद्ध नहीं, बल्कि मानवता की सीख देने का मार्ग था।
रावण का वध किसने किया? श्रीराम ने या अहंकार ने?
रावण की मृत्यु राम के हाथों अवश्य हुई,
लेकिन वास्तव में रावण को मारा उसके अहंकार ने,
उसकी विकृत सोच ने।
इसी तरह हमारे भीतर का रावण भी—
• क्रोध
• ईर्ष्या
• लालच
• और अहंकार
से बनता है
और यही हमें भीतर से नष्ट करता है।
क्या सीता ने लक्ष्मण रेखा पार की थी?
लोकमान्यता के अनुसार सीता ने लक्ष्मण रेखा पार की,
लेकिन असल में रेखा रावण ने पार की थी,
स्त्री-सम्मान की, मर्यादा की, सत्य की।
राम कथा हमें सिखाती है कि
मर्यादा तोड़ने वाला ही विनाश को आमंत्रित करता है।
कैकयी और राम का अद्भुत संबंध-
कैकयी का चरित्र अक्सर गलत समझा जाता है।
लेकिन राम ने भरत और राम दोनों को धनुर्विद्या सिखाते हुए जो कहा था, वही राम का असली स्वरूप है—
“मेरे लिए किसी का जीवन नहीं,
मां की आज्ञा अधिक महत्वपूर्ण है।”
राम का यह उत्तर दर्शाता है कि वे कर्तव्य और मर्यादा को सर्वोच्च मानते थे।
राम का विश्वव्यापी उद्देश्य
राम केवल अयोध्या के राजा नहीं बनना चाहते थे।
वे कैकयी से कहते हैं—
“मेरा कार्यक्षेत्र केवल अयोध्या नहीं,
पूरी दुनिया होनी चाहिए।”
इसी कारण वे 14 वर्षों का वनवास स्वयं चाहते थे।
उनका उद्देश्य था—
• धर्म की स्थापना
• अन्याय का विनाश
• और मानवता को राह दिखाना
रावण वध के बाद की सबसे सुंदर सीख
जब युद्ध समाप्त हुआ, देवता आशीर्वाद देने आए।
स्वर्ग से दशरथ भी आए और बोले—“पुत्र, मांगो क्या चाहते हो?”
राम ने कहा—
“पिताजी, यदि देना ही है तो
मां कैकयी को क्षमा कर दीजिए।”
जीत की घड़ी में भी राम ने सबसे पहले अपनी मां का स्मरण किया।
यही है मर्यादा पुरुषोत्तम राम की महानता।
श्रीराम के जीवन से क्या सीखें मिलती हैं?
रिश्तों में मर्यादा सबसे महत्वपूर्ण है।
माता-पिता की आज्ञा का सम्मान जीवन को सरल बनाता है।
घमंड व्यक्ति को रावण बना देता है।
आदर्श बनाए रखने के लिए त्याग आवश्यक है।
राम का जीवन कर्तव्य और धर्म का प्रतीक है।
निष्कर्ष (Conclusion)
राम कथा केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं है।
यह एक ऐसा जीवन-दर्शन है जो बताता है कि—
सफलता, शांति और संतोष—सब रामचरित्र को अपनाकर संभव है।
हर पात्र आपको जीवन को जीने की मानो पद्धति सिखा रहा हो। श्री दशरथ लक्ष्मण जी की पत्नी उर्मिला भक्त शिरोमणि भरत माता कौशल्या केवट निषाद राज युवराज अंगद श्री हनुमान मां सीता ऋषिराज जामवंत कहानी के सबसे बड़े विलेन रावण से भी आपको बहुत कुछ सीखने को मिल सकता है और 14 कला संपूर्ण मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम खुद हर एक पात्र अपने आप में मानो एक यूनिवर्सिटी है जिससे ना जाने क्या कुछ सीखा जा सकता है। साथियों आज के इस पोस्ट में रामायण के कुछ खास किरदारों में से सीखने का प्रयास करना।
राम सही का चुनाव करते हैं, बलशाली का नहीं। जीवन में अगर कभी चुनने का मौका मिले कि सही को चुने या ताकतवर को तो राम सही को चुनते हैं। वाक्य कुछ ऐसा है कि मां सीता का हरण हो चुका है और प्रभु राम सीता की खोज में भटक रहे हैं। अब हनुमान जी की वजह से उनकी भेंट होती है सुग्रीव से। सीता हरण के बाद श्री राम के पास चॉइस थी कि वो सुग्रीव से दोस्ती करें या उसके भाई बाली से। बाली जो कि सुग्रीव से कहीं ज्यादा ताकतवर था। उसको वरदान था कि लड़ने वाले की आधी शक्ति छीन लेता था और उसने रावण को पहले ही परास्त कर रखा था। यही नहीं वो रावण को 6 महीने तक अपनी कांख में दबाकर घूमता रहा और बाद में छोड़ दिया।
अगर राम बाली से दोस्ती करते तो बाली तो एक ही दिन में रावण को हराकर युद्ध खत्म कर सकता था। कोई झंझट ही नहीं होती। लेकिन राम ऐसा नहीं करता। राम ने सुग्रीव से दोस्ती करी और बाली का वध किया क्योंकि राम जानते थे कि बाली गलत है। उसने अपने भाई सुग्रीव की पत्नी को अपने पास रखा हुआ था। बाली को जब श्री राम ने तीर मारा तो मृत्यु की घड़ी में बाली श्री राम से पूछता भी है कि मैं बैरी सुग्रीव प्यारा अवगुण कम नाथ मोहे मारा कि हे प्रभु मैं बैरी हो गया दुश्मन हो गया और मेरा भाई सुग्रीव आपका प्यारा हो गया। किस कारण मुझे मारा?
तो राम उत्तर देते हैं अनुज वधू भगनी सुत नारी सुन शठ कन्या समय चारी इनहीं कुदृष्टि बिलोकई जो ही ताही वधे कछु पाप ना होई जी हां भगवान श्री राम उसका जवाब देते हैं हे मूर्ख सुन छोटे भाई की पत्नी बहन पुत्र की स्त्री और कन्या ये चारों एक समान है। इन पर बुरी नजर डालने वाले का वध करने पर जरा भी पाप नहीं लगता। तूने बुरी नजर डाली है। मानो राम इस कथा के माध्यम से संदेश दे रहे हो कि दोस्त दुनिया में सही का साथ देना ताकतवर का नहीं।
राम जमीन पर सोए तो वो भी जमीन पर सोई। राम जी ने कंदमूल खाए तो सीता जी ने भी वही ग्रहण किया। राजा जनक की बेटी दशरथ की पुत्रवधू चाहती तो अपना जीवन अयोध्या में आराम से बिता सकती थी। लेकिन नहीं मानो संसार को संदेश देने के लिए ही मां सीता का जन्म हुआ था कि असली संगिनी की पहचान दुख में ही होती है और सबसे बड़ी सीख मां सीता तब देती है।
जब वे सोने का हिरण देखती है और राम को सोने के हिरण के पीछे भेजती है अपने वनवास काल में मां सीता ने सोने का हिरण देखा और राम को सोने के हिरण के पीछे भेजा कि ये कहकर कि मुझे लाकर आप इसे दें। राम समझाते हैं कि देवी यह मायाजाल है। सोने का हिरण नहीं होता, लेकिन सीता नहीं मानती और जिद करती है। नतीजा सीता हरण होता है। रावण राम की अनुपस्थिति में मां सीता का हरण कर लेता है।
मानो उस प्रकरण से भी मां सीता संसार को संदेश दे रही हो कि सोने का हिरण कभी नहीं होता। जल्दी अमीर होने के ख्वाब आपको बर्बाद कर सकते हैं। ऐसे माया जाल से जरूर बचें। रामायण के ये कुछ पात्र आपके जीवन में कमाल की रोशनी लेकर आ सकते हैं। अगर इन पात्रों की लर्निंग्स को आप और हम अपने जीवन में लगाएं तो जीवन स्वर्ग हो सकता है।
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