किसी भी गोल सेटिंग या लक्ष्य को हासिल करने के शक्तिशाली सिद्धांत।

किसी भी लक्ष्य को हासिल करने के लिए एक गोल सेटिंग किया जाता है। जिससे ये बिलकुल साफ़ दिखाई दे की पहुंचना कहा पर है। और आपको उसके लिए क्या क्या करने पड़ेंगे। गोल सेटिंग पर कुछ मुख्य सिद्धांतो समझते है ।

गोल सेटिंग के पांच प्रिंसिपल।

गोल सेटिंग पर हजारों किताबें लिखी गईं, लोगों को ढेर सारी सलाहें मिलीं, लेकिन ground reality वही है।
गोल सेट बहुत होते हैं, पूरे बहुत कम होते हैं।

इसीलिए आज यहां आपको 5 ऐसे प्रिंसिपल मिलेंगे, जिन्हें अगर आपने अपनी जिंदगी में उतार लिया, तो आपकी पूरी लाइफ बदल सकती है।

क्यों लोग अपने गोल सेटिंग नहीं कर पाते?

अगर किसी भी गोल को हासिल करना आसान होता, तो इस दुनिया का हर इंसान खुशहाल जीवन जी रहा होता।
हर नया साल आते ही लोग गोल सेट करते हैं—
“इस बार ये करूंगा, वो करूंगा…”
लेकिन कितनों के गोल सच में पूरे होते हैं?
अधिकतर लोग सिर्फ बातें करते हैं, पर एक्शन बहुत कम लेते हैं।

 

अगर किसी भी गोल को हासिल करना आसान होता, तो इस दुनिया का हर इंसान खुशहाल जीवन जी रहा होता।
हर नया साल आते ही लोग गोल सेट करते हैं—
“इस बार ये करूंगा, वो करूंगा…”
लेकिन कितनों के गोल सच में पूरे होते हैं?
अधिकतर लोग सिर्फ बातें करते हैं, पर एक्शन बहुत कम लेते हैं।

गोल सेटिंग के पांच प्रिंसिपल।

गोल सेटिंग पर हजारों किताबें लिखी गईं, लोगों को ढेर सारी सलाहें मिलीं, लेकिन ground reality वही है।
गोल सेट बहुत होते हैं, पूरे बहुत कम होते हैं।

इसीलिए आज यहां आपको 5 ऐसे प्रिंसिपल मिलेंगे, जिन्हें अगर आपने अपनी जिंदगी में उतार लिया, तो आपकी पूरी लाइफ बदल सकती है।


गोल सेटिंग का पहला प्रिंसिपल – एक समय में सिर्फ एक ही Goal पर फोकस करें।

दुनिया के सबसे अमीर लोग जैसे वारेन बफेट और बिल गेट्स भी कहते हैं कि सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है — Focus (एकाग्रता)। दोस्तों इसे एक कहानी से समझते है।

टोडरमल की कहानी — एकाग्रता की ताकत

महान जैन साहित्यकार टोडरमल ‘मोक्ष मार्ग’ नामक ग्रंथ लिख रहे थे।
6 महीने तक उनकी माँ सब्जी में नमक डालना भूल जाती थीं, लेकिन टोडरमल को पता ही नहीं चला, क्योंकि उनका पूरा ध्यान सिर्फ अपने ग्रंथ पर था।

यही है एकाग्रता की असली शक्ति।

दिमाग मल्टीटास्किंग के लिए बना ही नहीं है

एक तीरंदाज भी एक समय में एक ही निशाना साधता है।
एक शूटर भी एक ही समय में एक ही बुलेट एक निशाने पर लगाता है।

बहुत सारे काम एक साथ करने वाले लोग… अक्सर कुछ भी नहीं करते।

Domino’s का Example

1960 में Domino’s ने शुरुआत में सिर्फ पिज़्ज़ा बेचे।
क्योंकि उनका एक ही लक्ष्य था:
“Fast Pizza Delivery”

एक Goal → एक Direction → एक Result


 एक छोटा लेकिन महत्वपूर्ण Goal – अपनी हेल्थ और हेल्थ इंश्योरेंस

अक्सर लोग करियर, पैसे और बड़े-बड़े गोल बनाते हैं, लेकिन हेल्थ को भूल जाते हैं।
सही समय पर हेल्थ इंश्योरेंस न होना बाद में भारी नुकसान पहुंचा सकता है।

✔ अपनी हेल्थ का ख्याल रखें
✔ परिवार के लिए हेल्थ इंश्योरेंस लें
✔ आज छोटी प्रीमियम, कल बड़े खर्चों से बचाती है


 दूसरा प्रिंसिपल – सिर्फ 24 घंटे का Goal सेट करें

पूरे साल का या पूरे महीने का गोल मत बनाइए।
आप बस ये तय करें —
आज क्या करना है?

सारा ध्यान सिर्फ आज के 24 घंटे पर लगा दें।

John Grisham Example

उन्होंने कहा:
“मैं रोज सिर्फ 1 पेज लिखूंगा।”

1 दिन = 1 पेज
1 हफ्ता = 1400 शब्द
2 साल = एक पूरी किताब!

Dashrath Manjhi Example

उन्होंने रोज सिर्फ एक पत्थर तोड़ने का लक्ष्य रखा।
और अकेले ने 25 फीट ऊँचा, 30 फीट चौड़ा और 360 फीट लंबा पहाड़ काटकर रास्ता बना दिया।

क्यों 24 घंटे वाला Goal काम करता है?

  • छोटे गोल से दिमाग नहीं घबराता

  • बाधाएँ कम आती हैं

  • मोटिवेशन बना रहता है

  • जल्दी रिज़ल्ट मिलते हैं


 तीसरा प्रिंसिपल – अपने Goal को Crystal Clear बनाएं

लक्ष्य साफ-साफ दिखना चाहिए।
कन्फ्यूजन होगा तो फोकस नहीं बनेगा।

Prithviraj Chauhan Example

चंद्रबरदाई ने एकदम स्पष्ट निर्देश दिए:
“चार बांस 24 गज…”
और उसी clarity से पृथ्वीराज ने निशाना लगाकर मोहम्मद गौरी को मार गिराया।

Salesman Example

एक सेल्समैन ने अपनी इनकम 50,000 से बढ़ाकर 1 लाख कर ली, क्योंकि उसे अस्पताल में पैसे जमा करने थे।
उसका गोल 100% क्लियर था

सीख:

अगर लक्ष्य साफ है → रास्ते साफ हो जाते हैं।


चौथा प्रिंसिपल – अपने Goal को लिखें (Write it down)

सिर्फ मन में रखे Goals ज्यादातर पूरे नहीं होते।
कागज़ पर लिखे Goals पूरे होने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।

Harvard Research

  • 84% लोगों के पास कोई गोल ही नहीं

  • 13% के पास गोल थे, पर लिखे नहीं थे

  • सिर्फ 3% के पास लिखे हुए गोल थे
    और वे बाकी 97% लोगों से 10 गुना ज्यादा पैसा कमाते थे।

Examples:

  • Jim Carrey ने खुद के नाम का $10 million का चेक लिखा

  • Bruce Lee ने अपने भविष्य की सफलता का लेटर लिखा

  • और दोनों ने वो सब हासिल किया

गोल कैसे लिखें?

गलत: “आज मैं बहुत बेचूंगा।”
सही: “आज मैं 20 प्रोडक्ट बेचूंगा।”

गलत: “मैं वज़न कम करूंगा।”
सही: “मैं 5 किलो वजन कम करूंगा।”

✔ सबसे महत्वपूर्ण गोल ऊपर लिखें
✔ हाथ से लिखें, मोबाइल पर टाइप नहीं


 पांचवां प्रिंसिपल – अपने Goal को दिन में 10 बार याद करें

अगर आप गोल को 10 दिनों में एक बार याद करेंगे → कुछ नहीं होगा।
अगर आप गोल को एक दिन में 10 बार याद करेंगे → आपकी दिशा बदल जाएगी।

Udham Singh Example

1919 जलियांवाला बाग नरसंहार के बाद
उनका सिर्फ एक ही गोल था —
जनरल डायर को मारना।

21 साल तक उन्होंने रोज इस गोल को 50 बार याद किया।
और आखिरकार 1940 में उन्होंने वह लक्ष्य पूरा किया।

क्यों अपने Goal को याद रखना जरूरी है?

  1. आपका फोकस समस्या पर नहीं, सॉल्यूशन पर रहता है

  2. दिमाग सिर्फ एक चीज पकड़ सकता है — Problem या Opportunity
    इसलिए हमेशा Opportunity पर ध्यान रखें।

हेनरी फोर्ड कहते थे:
“Obstacles वही चीज़ें हैं जो तब दिखती हैं, जब नजर Goal से हट जाती है।”


 निष्कर्ष – Action ही असली चाबी है

जीवन एक ही है।
सिर्फ वीडियो देखकर, किताबें पढ़कर कुछ नहीं होता।
Action लो। हर दिन लो।

ये 5 प्रिंसिपल अपनाओ:

  1. एक समय में एक Goal

  2. 24 घंटे वाला Goal

  3. क्लियर गोल

  4. लिखित गोल

  5. गोल को रोज याद रखना

और आपका जीवन जरूर बदलेगा।

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