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Procrastination यानी टालमटोल की आदत- कारण, नुकसान और इसे कैसे छोड़ें?
Procrastination (टालमटोल) क्या होता है?
“कल कर लूंगा।”
यह तीन शब्द जितने आसान दिखते हैं, असल में उतने ही खतरनाक होते हैं।
बचपन से ही हम अपने कामों को बाद के लिए टालते आए हैं—चाहे पढ़ाई हो, व्यायाम हो, बिल भरना हो या ऑफिस का कोई जरूरी काम।
टालमटोल वो मीठा ज़हर है जो धीरे–धीरे आपके भविष्य को अंदर से खा जाता है।
टालमटोल कोई नई आदत नहीं — सदियों पुरानी समस्या है
कबीरदास ने सदियों पहले ही चेतावनी दी थी:
“कल करे सो आज कर, आज करे सो अब।”
लेकिन आजकल लोग मजाक में इसका उल्टा दोहा बोलने लगे हैं:
“आज करे सो कल कर, कल करे सो परसों।”
यानी काम को टालने की आदत इंसान के स्वभाव में हमेशा रही है, बस आज इसका असर कई गुना बढ़ चुका है।
एक प्रेरक कहानी — कैसे Procrastination ने उजाड़ दिया भविष्य
2017 में एक लड़का UPSC की तैयारी कर रहा था।
सब कुछ था—दिमाग, पैसा, परिवार का सपोर्ट…
बस एक चीज़ नहीं थी—एक्शन।
हर दिन उसी एक लाइन से शुरुआत होती:
“कल से शुरू करूंगा।”
लेकिन वह “कल” कभी आया ही नहीं।
तीन मौके हाथ से निकल गए और वो डिप्रेशन में चला गया।
उसने कहा:
“मैंने पढ़ाई छोड़ी नहीं… बस टाल दी। और यही मेरी हार की वजह बनी।”
रावण ने भी मृत्यु से पहले लक्ष्मण से यही कहा था:
“मैं टालता रहा… और काल ने मुझे मार दिया।”
हम काम क्यों टालते हैं? (Psychology of Procrastination in Hindi)
1. Instant Reward System
हम वो काम कभी नहीं टालते जिनसे तुरंत मजा मिलता है—
✔ मूवी
✔ पार्टी
✔ मोबाइल
✔ नशे की चीजें
लेकिन जिन कामों का फायदा देर से मिलता है जैसे —
किताब पढ़ना
एक्सरसाइज
सुबह जल्दी उठना
उन्हें हम कल पर छोड़ देते हैं।
2. परफेक्शन का भ्रम (Perfectionism)
परफेक्ट काम करने की इच्छा अक्सर काम शुरू ही नहीं होने देती।
Content creators, entrepreneurs, writers — कोई भी परफेक्ट शुरुआत नहीं करता, लेकिन लगातार कोशिश करता है।
3. ओवरकॉन्फिडेंस
“मैं तो कभी भी कर लूंगा…”
यही सोच इंसान को खरगोश बना देती है —
और कछुए जैसी मेहनत करने वाले लोग आगे निकल जाते हैं।
4. डिस्ट्रैक्शन — आधुनिक दुनिया की सबसे बड़ी समस्या
मोबाइल नोटिफिकेशन, सोशल मीडिया, गेम्स…
काम शुरू करते ही कुछ न कुछ ध्यान भटका देता है।
फोकस टैलेंट नहीं, एक Discipline है।
5. डर (Fear of Failure)
बहुत से लोग शुरुआत इसलिए नहीं करते क्योंकि उन्हें डर होता है—
“अगर फेल हो गया तो?”
लेकिन दुनिया के सभी बड़े लोग हजारों बार फेल होकर आगे बढ़े हैं।
Procrastination छोड़ने के 7 आसान और practical तरीके
1. छोटे कदमों से शुरुआत करें
एक बड़ा काम मत उठाइए।
उसे छोटे-छोटे हिस्सों में बांटिए।
2. 5-Minute Rule अपनाएं
खुद से कहें—
“बस 5 मिनट करूंगा।”
ये 5 मिनट धीरे-धीरे 50 मिनट बन जाते हैं।
3. Distraction हटाइए
फोन साइलेंट
नोटिफिकेशन ऑफ
सोशल मीडिया की दूरी
4. अपने WHY को मजबूत बनाइए
जब आपको पता हो कि काम क्यों जरूरी है,
तो दिमाग HOW खुद ढूंढ लेता है।
5. Deadline लगाएं
जहां deadline नहीं होती, वहां दिमाग automatically टालता है।
अपने लिए समय सीमा तय करें।
6. Perfection को छोड़ें, Progress को पकड़ें
परफेक्ट समय कभी नहीं आता।
आज शुरू करें, चाहे अधूरा ही क्यों न लगे।
7. खुद को दोष मत दीजिए
पिछली गलतियाँ अतीत थीं।
आज से नई शुरुआत करें।
निष्कर्ष (Conclusion)
Procrastination कोई जन्मजात आदत नहीं है।
यह एक पैटर्न है जिसे सही mindset, छोटे कदम और consistent action से हमेशा के लिए बदला जा सकता है।
याद रखिए —
“जो आज करेगा, वही कल जीतेगा।”
और कई कहानियाँ इसलिए अधूरी रह जाती हैं,
क्योंकि हमने कलम उठाई ही नहीं।
FAQs
Q1. Procrastination क्या है?
टालमटोल यानी किसी जरूरी काम को बार-बार बाद के लिए टालते रहना ही Procrastination है।
Q2. Procrastination क्यों होता है?
डर, डिस्ट्रैक्शन, परफेक्शन, ओवरकॉन्फिडेंस और instant reward system इसकी मुख्य वजहें हैं।
Q3. Procrastination कैसे छोड़ें?
5-minute rule, छोटे steps, deadline, और distractions को हटाना सबसे असरदार तरीके हैं।
Q4. क्या Procrastination एक आदत है?
हाँ, यह एक सीखी हुई आदत है जिसे अभ्यास से बदला जा सकता है।
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